- आमतौर पर गठिया होने का प्रमुख कारण आनुवांशिक होता है, लेकिन कई बार किसी भयंकर बीमारी या संक्रमित रोग के कारण भी गठिया रोग हो जाता है।
- आर्थराइटिस को आयुर्वेद में अम वात के नाम से जाना जाता है।
- आयुर्वेद में गठिया होने के कारकों में खराब पाचन, खानपान की गलत आदतें और निष्क्रिय जीवनशैली के साथ ही वात दोष को माना गया है।
- आयुर्वेद में गठिया का पूरी तरह से इलाज किया जाता है न कि सिर्फ दर्द को खत्म करने की कोशिश की जाती है। यानी गठिया का स्थायी इलाज आयुर्वेद में ही संभव है।
- गठिया का इलाज लंबा होता है। इसीलिए आयुर्वेद में गठिया के इलाज को योजनाबद्ध तरीके से किया जाता है इसलिए पीडि़त की जीवनशैली, रहन-सहन आदि पर खास ध्यान दिया जाता है।
- गठिया में सिर्फ आयुर्वेदिक औषधियां ही नहीं बल्कि अच्छी खुराक लेने की सलाह भी दी जाती है।
- दरअसल, आयुर्वेद के इलाज के दौरान, गठिया के मूल कारणों को खोजने और फिर उसका सही रूप में उपचार करने पर अधिक ध्यान दिया जाता है।
- यदि किसी व्यक्ति में गठिया रोग वात बिगड़ने और दोषपूर्ण पाचन की वजह से हुआ है तो आयुर्वेद में उसके इलाज स्वरूप रोगी की असंतुलित शारीरिक ऊर्जाओं को शांत करने और पाचन क्षमता बेहतर करने पर ध्यान केन्द्रित किया जाता है।
- इलाज के दौरान रोगी को दर्द कम करने के लिए ऐंटी-रयूमैटिक और
ऐंटी-इंफ्लेमेट्री दवाएं दी जाती हैं साथ ही भरपूर आराम करने की सलाह दी
जाती है।
गठिया के इलाज के लिए इम्यून सिस्टम का मजबूत होना बेहद आवश्यक है, साथ ही पाचन तंत्र का भी बेहतर होना जरूरी है। यानी औषधियों के साथ ही डाइट प्लानिंग बेहद जरूरी है।






0 comments:
Post a Comment