ब्रौनकाईटिस दो प्रकार के होते हैं, तीव्र और दीर्घकालीन। तीव्र ब्रौनकाईटिस की बीमारी अल्पकालीन होती है जो कि विषाणु जनित रोग फ्लू या सर्दी-ज़ुकाम के होने के बाद विकसित होती है। इसके लक्षण बलगम के साथ सीने में बेचैनी या वेदना, बुखार और कभी कभी श्वाश में तकलीफ का होना होता है। तीव्र ब्रौनकाईटिस कुछ दिनों या कुछ हफ़्तों तक जारी रहती है ।
दीर्घकालीन ब्रांकाइटिस की विशेषताएं होती हैं, महीने के अधिक से अधिक दिनों, वर्ष में तीन महीनों, और लगातार दो वर्षों तक और किसी दूसरे कारण के अभाव में, बलगम वाली अनवरत खाँसी का जारी रहना। दीर्घकालीन ब्रौनकाईटिस के रोगी सांस की विभिन्न तकलीफें महसूस करते हैं, और यह अवस्था वर्ष के अलग भागों में बेहतर या बदतर हो सकती है ।
ब्रौनकाईटिस के कारण क्या हैं?
तीव्र ब्रौनकाईटिस उसी विषाणु के कारण होती है जिसके कारण सर्दी-ज़ुकाम और फ्लू होते हैं और दीर्घकालीन ब्रौनकाईटिस ज़्यादातर धूम्रपान से होती है। यद्यपि, दीर्घकालीन ब्रांकाइटिस तीव्र ब्रांकाइटिस के अनवरत हमले के कारण भी होती है। इसके अलावा प्रदूषण, धूल, विषैले गैस, और अन्य औद्योगिक विषैले तत्व भी इस अवस्था के ज़िम्मेदार होते हैं।
ब्रांकाइटिस के कारण और लक्षण:
- ब्रौन्काई में सूजन या जलन
- खाँसी
- श्वेत, पीले, हरे या भूरे रंग के बलगम का निर्माण
- हाँफना
- साँस की घरघराहट
- थकावट
- बुखार और सर्दी ज़ुकाम
- सीने में पीड़ा या बेचैनी
- बंद या बहती नाक
ब्रौनकाईटिस किसे हो सकता है?
- धूम्रपान करने वालों को
- वे जिनकी रोग प्रतिकारक क्षमता कमज़ोर पड़ गई होती है
- वरिष्ठ और शिशु
- वे लोग जिन्हें विषैले तत्वों के माहौल काम करना पड़ता है
ब्रौनकाईटिस के आयुर्वेदिक उपचार
- ब्रौनकाईटिस की बीमारी आजकल तेज़ गति से बढ़ रही है, और खासकर के बच्चे इस बीमारी के शिकार जल्दी होते हैं। दूध में शक्कर की बजाय 1 या 2 चम्मच शहद मिलाकर पिलाने से ब्रौनकाईटिस से काफी हद तक राहत मिलती है। अगर नियमित रूप से दूध में शहद मिलाकर पिलाया जाये तो खांसी तुरंत भाग जायेगी और वापस नहीं आएगी।
- सौंठ और दालचीनी को सामान मात्रा में पीसकर उसका चूरा बना लें, और इस चूरे का एक चम्मच आधे ग्लास पानी में मिलाकर उसे उबाल लें, और एक ही सांस में गरमागरम पी लें। इससे भी ब्रौनकाईटिस से तुरंत राहत मिलती है।
- सौंठ और हरड का चूरा बनाकर अच्छी तरह मिला दें, और इस चूरे का आधा चम्मच 2 चम्मच शहद के साथ मिलाकर सेवन करें, इससे ब्रौनकाईटिस के उपचार में सहायता मिलती है।
- 15 ग्राम गुड़ के साथ 5 ग्राम सौंठ मिलाकर एक महीने तक नियमित रूप से सेवन करने से भी ब्रौनकाईटिस में राहत मिलती है।
- अदरक के रस के 2 चम्मच शहद के दो चम्मच शहद के साथ सेवन करने से भी ब्रौनकाईटिस से राहत मिलती है।
- नियमित रूप से एक सेब का सेवन या 1 या 2 चम्मच आंवले के जाम का सेवन भी ब्रौनकाईटिस की राहत में काफी सहायक सिद्ध होता है।
क्या करें क्या न करें:
- धूम्रपान बिल्कुल भी न करें।
- उन लोगों से थोड़ा दूर रहें जो सर्दी-ज़ुकाम से ग्रस्त हैं।
- हर वर्ष फ्लू का टीका लगवाएं।
- निमोनिया का टीका भी लगवाना चाहिए, खासकर 60 वर्ष से ऊपर की उम्र वालों को।
नियमित रूप से हाथों को अच्छी तरह से धोएं, खासकर कुछ खाने से पहले।
नम, सर्द और प्रदूषण वाली जगहों से दूर रहें।
नम, सर्द और प्रदूषण वाली जगहों से दूर रहें।










